थप्पड़ मूवी रिव्यू रेटिंग: 4/5 स्टार्स (चार स्टार्स)

स्टार कास्ट: तापसी पन्नू, कुमुद मिश्रा, पावेल गुलाटी, रत्ना पाठक शाह, गीतिका विद्या, तन्वी आज़मी, दिया मिर्ज़ा, माया सारा

निर्देशक: अनुभव सिन्हा

क्या है अच्छा: लेखन की वजह से फिल्म भारी होने के बावजूद, कहानी की रेखा को नाटकीय नहीं बनाता है. साथ ही एक्ट्रर्स का प्रदर्शन आपको कहानी के कठिन बिंदु को समझाने में काफी मदद करता है.

क्या बुरा है: फिल्म का समय 140 मिनट है, जो थोड़ा ज्यादा है. कहीं न कहीं इसकी कहानी कट के आसानी से 2 घंटे की हो सकती थी.

लू ब्रेक कब लें: सिर्फ इंटरवल के समय जा सकते हैं क्योंकि कहानी एक गहरे प्रभाव के साथ आपको हर समय खुद से जोड़े रखती है.

देखें या नहीं?: यह फिल्म उस हर आदमी के लिए है, जिनकी जिंदगी में एक महिला बहुत मायने रखती है या फिर यूं कहें कि जिनसे आप बेइंतहा प्यार करते हैं उनके लिए तो जरूर देखें.

कहानी एक आम जिंदगी को दर्शाती है, जिसमें अमृता (तापसी पन्नू) का किरदार अहम है. अमृता (तापसी पन्नू) एक गृहिणी है, जो अपने परिवार के सपनों को जी रही है. उसका पति विक्रम (पावेल गुलाटी) सिर्फ एक पति की भूमिका निभाना जानता है, जो सिर्फ इस गुत्थी में फंसा है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं.

एक आम इंसान की तरह विक्रम बिजनेसमैन और अपने परिवार से बेहद प्यार करने वाला व्यक्ति है. वह अपनी पत्नी अमृता को बहुत प्यार करता है. हर परिवार की तरह ये दोनों एक दूसरे के बेहतर भविष्य के लिए यूके शिफ्ट होने की योजना बनाते हैं. इसकी खुशी बांटने के लिए विक्रम घर पर एक पार्टी रखता है, जिसके बाद कहानी में आता है एक नया मोड़.

दरअसल, विक्रम घर की पार्टी के बीच एक पल के दौरान अमृता को थप्पड़ मार देता है. वहीं, सब इसे आम बात समझ कर भूल जाते हैं, लेकिन अमृता के लिए यह एक थप्पड़ उसके अस्तिव पर सवाल पैदा करता है, जो उसके दिल में एक गहरी छाप छोड़ता है. इसके बाद वह अपने आस-पास के विभिन्न लोगों की सोच का सामना करते हुए एक ठोस कदम उठाती है. ये सोचने वाली बात है कि आखिर एक थप्पड़ की वजह वह इतना बड़ा कौन सा फैसला करती है और क्यों?

कुछ भी सोचने से पहले नीचे पढ़ें.

थप्पड़ मूवी रिव्यू: स्क्रिप्ट एनालिसिस

कहते हैं कहानी में अगर कोई संदेश मिल जाए तो उसे देखने में दिलचस्पी और बढ़ जाती है. खासकर के जब हमें ऐसी फिल्में देखना बेहद पसंद हो. जी हां, यदि आपको इस तरह की फिल्में पसंद हैं तो आप पहले यह समझने में सक्षम हो कि निर्माताओं ने आखिर एक शॉर्ट फिल्म के विचार के आसपास एक फीचर फिल्म कैसे बनाई होगी. अनुभव सिन्हा कहानी के माध्यम से आपके दिमाग के साथ बेहतर तरीके से खेलते हैं. वो कहानी के हर पहलू को आप से जोड़ कर रखते हैं.

अगर आप फिल्म में धार्मिक रूप से शामिल हैं, तो यह आपको बेहतर इंसान बनाने में मदद करेगी. यहां तक ​​कि अगर आप अपने जीवन में अपने आप से बहुत बिजी हैं, तो भी स्क्रिप्ट आप से एक सवाल जरूर पूछती है. यूं कहूं तो थप्पड़ शब्द सुनकर ही गुस्सा आ जाता है. ठीक उसी तरह यह फिल्म आपके दिल के साथ-साथ दिमाग पर भी गहरी छाप छोड़ती है.

थप्पड़ मूवी रिव्यू: स्टार परफॉर्मेंस

तापसी पन्नू के संवाद बेहतरीन हैं. खासकर जब वह बोलती हैं, “इस समाज में बदलाव लाने के लिए मुझे अपना काम करने दें और आप अपना काम करें.” इस संवाद ने मेरा दिल जीत लिया. यह वहीं, संवाद है जिसके सीन में तापसी बेहद अच्छा प्रदर्शन देती हैं. वह पूरे किरदार को संभाल कर रखती हैं. अभिनेत्री के किरदार को शब्दों में बताना मुश्किल है. आपको उनके द्वारा किए गए बेहतरीन प्रदर्शन को महसूस करने के लिए फिल्म को देखने की आवश्यकता है.

अपनी फिल्मोग्राफी में हर किरदार के साथ, कुमुद मिश्रा ने अच्छा किया है. वह अपने किरदार की मासूमियत को इतनी मधुरता से निभाते हैं, जिस पर विश्वास नहीं होता कि वह अपने वास्तविक जीवन में भी ऐसे नहीं हैं. पावेल गुलाटी भी अपने किरदार के साथ अच्छे हैं.

ठहरिए थोड़ा सोचे और बताएं कि रत्ना पाठक शाह अपने किरदार के लिए क्या कर सकती हैं. यह समझने के लिए, साराभाई और कपूर एंड संस में उनके अभिनय को याद करें. वह दोनों में एक मां थी और अब थप्पड़ में दिखाई देती है. उनके ऊपर फिल्माए गए भावनात्मक सीन बेहद ही इमोशनल करते हैं.

फ़िल्म के बारे में मुझे बहुत सारी चीज़ें पसंद आईं, गीतिका विद्या का सबसे अच्छा प्रदर्शन मेरे विचार में आने वाले वर्षों के बाद पहली बात होगी जब हम इस पर चर्चा करेंगे. जी हां, वह अपने हर सीन को बेहद ही खूबसूरत तरीके से दर्शाती हैं. तन्वी आज़मी भी उन सीन्स का खूबसूरती से समर्थन करती हैं.

एक और प्राकृतिक आकर्षण, दीया मिर्जा जो स्क्रिन पर आते ही सबका मन मोह लेती हैं. वो जब प्रेम में आती हैं, पूरा स्क्रिन चमक उठता है. माया सारा भी एक उत्कृष्ट प्रदर्शन देती हैं.

थप्पड़ मूवी रिव्यू: डायरेक्शन, म्यूजिक

अनुभव सिन्हा ने कुछ ईरानी, ​​तुर्की फिल्मों के कॉसेप्ट को स्वीकार किया, लेकिन वह खुद को इससे जुड़े ट्रैप में फंसने नहीं देते. वह फिल्म को दर्शकों से जोड़ने की पूरी कोशिश करते हैं. उनके पास फिल्म को हर रूप से दिखाने का मौका था और वह कहीं न कहीं सफल भी होते हैं.

गानों की बात करें तो ‘एक टुकड़ा धूप’ फिल्म में सही तरीके से मैच करता है. यह गाना कहानी में अच्छी तरह से फिट होता है और संवाद को भी अच्छे तरीके व्यक्त करता है. वहीं, मंगेश धाकड़ का बैकग्राउंड स्कोर काफी प्रभावशाली है.

थप्पड़ मूवी रिव्यू: द लास्ट वर्ड

कुल मिलाकर, ‘थप्पड़’ वो शब्द है, जो आप पर एक गहरा प्रभाव छोड़ती है. यह फिल्म इस शब्द के साथ सामाजिक कलंक पर सवाल उठाता है, जो लगभग 80% महिलाओं को परेशान करता है. कहीं न कहीं इस फिल्म को देख हम पुरुष ये जरूर सोचेंगे कि आखिर हम क्या कर रहे हैं? एक बार जरूर देखें.

चार स्टार!

थप्पड़ ट्रेलर…

थप्पड़ 28 फरवरी, 2020 को रिलीज़ होगी.

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